
याता ये यांति यास्यंति भदंता मोक्षमव्ययं ।
निर्ममत्वेन ते तस्मान्निमर्मत्वं विचिंतयेत् ॥15॥
जो मुक्त अविनाशी हुए, हो रहे होंगे वे सभी ।
इस निर्ममत्व उपाय से, यों भाओ निर्ममता सभी ॥१०.१५॥
अन्वयार्थ : जो मुनिगण मोक्ष गये, जा रहे हैं और जायेंगे उनके मोक्ष की प्राप्ति में यह निर्ममत्व ही कारण है; इसी की कृपा से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई है, इसलिये मोक्षाभिलाषियों को निर्ममत्व का ही ध्यान करना चाहिये ।