
प्रतिक्षणं प्रकुर्वति चिंतनं परवस्तुनः ।
सर्वे व्यामोहिता जीवाः कदा कोऽपि चिदात्मनः ॥8॥
मोहित सभी चिन्तन करें, पर वस्तुओं का प्रतिक्षण ।
अति विरल हैं चिन्मय निजातम, ध्यान करते प्रतिक्षण ॥८॥
अन्वयार्थ : [व्यामोहिता] अन्य में विशेष रूप से मोहित [सर्वे] सभी [जीवा] जीव [प्रतिक्षणं] प्रति-समय [पर-वस्तुन] पर-पदार्थों का [चिंतनं] चिन्तन [प्रकुर्वन्ति] विशेष रूप से करते हैं [ [चित्+आत्मन] चित्स्वरूप का [कदा] कभी [क:+अपि] कोई ही ॥८॥