+ इसकी गुणों की अपेक्षा पुष्टि -
दृश्यंते बहवो लोके नानागुणविभूषिताः ।
विरलाः शुद्धचिद्रूपे स्नेहयुक्ता व्रतान्विताः ॥9॥
बहुविध गुणों से सुशोभित, जग में अनेकों हैं सदा ।
निज शुद्ध चिद्रूप में रुचि, व्रत विभूषित विरले सदा ॥९॥
अन्वयार्थ : [लोके] लोक में [नाना-गुण-विभूषिता] अनेक गुणों से सुशोभित [बहव] अनेकों [दृश्यन्ते] दिखाई देते हैं [(परन्तु) शुद्ध-चिद्रूपे] शुद्ध-चिद्रूप में [स्नेह- युक्ता] प्रीतिवान [व्रत+अन्विता] व्रतों से सुशोभित [विरला] विरल (हैं) ॥९॥