
यदि शुद्धं चिद्रूपं निजं समस्तं त्रिकालगं युगपत् ।
जानन् पश्यन् पश्यति तदा स जीवः सुदृक् तत्त्वात् ॥9॥
त्रैकालगत युगपत् सभी, निज शुद्ध चिद्रूप देखता ।
जो जान श्रद्धा करे वह, परमार्थ से समकित कहा ॥९॥
अन्वयार्थ : जो जीव तीन काल में रहनेवाले आत्मिक शुद्ध समस्त चिद्रूप को एक साथ जानता देखता है, वास्तविक दृष्टि से वही सम्यग्दृष्टि है ।