+ परम-ज्ञान की परिभाषा -
यदि चिद्रूपेऽनुभवो मोहाभावे निजे भवेत्तत्वात् ।
तत्परमज्ञानं स्याद् बहिरंतरसंगमुक्तस्य ॥13॥
निज मोह विरहित दशा में, बहिरन्त: परिग्रह से रहित ।
का स्वयं चिद्रूप अनुभवन, उत्कृष्ट ज्ञान कहा नियत ॥१३॥
अन्वयार्थ : मोह का सर्वथा नाश हो जाने पर बाह्य-अभ्यन्तर दोनों प्रकार के परिग्रहों से रहित पुरुष जो आत्मिक शुद्ध-चिद्रूप का अनुभव करता है, वही वास्तविकरूप से परम ज्ञान है ॥१3॥