मूलोत्तरगुणानां यत्पालनं मुक्तये मुनेः ।
दृशा ज्ञानेन संयुक्तं तच्चारित्रं न चापरं ॥15॥
सद्दर्श ज्ञान सहित मुनि के, मूल उत्तर गुणों का ।
शिव-हेतु पालन कहा चारित्र, है नहीं वह अन्य का ॥१५॥
अन्वयार्थ : सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञान के साथ जो मूल और उत्तर गुणों का पालन करना है, वह चारित्र है; अन्य नहीं तथा यही चारित्र, मोक्ष का कारण है ॥१५॥