+ सम्यक्चारित्र की विशेषता -
ज्ञप्त्या दृष्टया युतं सम्यक् चारित्रं तन्निरुच्यते ।
सतां सेव्यं जगत्पूज्यं स्वर्गादिसुखसाधनं ॥17॥
सद्दर्श ज्ञप्ति सहित, सच्चारित्र सेवन-योग्य है ।
सज्जनों को स्वर्गादि सुख, साधन कहा जग-पूज्य है ॥१७॥
अन्वयार्थ : सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञान के साथ ही सम्यक्-चारित्र सज्जनों को आचरणीय है और वह ही समस्त संसार में पूज्य तथा स्वर्ग आदि सुखों को प्राप्त करानेवाला है ।