+ निश्चय चारित्र का अस्ति-नास्ति परक स्वरूप -
यजि चिद्रूपे शुद्धे स्थितिर्निजे भवति दृष्टिबोधबलात् ।
परद्रव्यास्मरणं शुद्धनयादंगिनो वृत्तं ॥19॥
सद्दृष्टि सम्यग्ज्ञान बल से, शुद्ध चिद्रूप स्थिति ।
में यदि हो परद्रव्य विस्मृत, शुद्ध-नय चारित्र ही ॥१९॥
अन्वयार्थ : यदि इस जीव की सम्यग्दर्शन और सम्यग्ज्ञान के बल से शुद्ध-चिद्रूप में निश्चलरूप से स्थिति होती है, तब पर-द्रव्यों का विस्मरण, वह शुद्ध-निश्चय-नय से चारित्र समझना चाहिए ।