
रत्नत्रयं किल ज्ञेयं व्यवहारं तु साधनं ।
सद्भिश्च निश्चयं साध्यं मुनीनां सद्विभूषणं ॥20॥
व्यवहार रत्नत्रय सु साधन, साध्य है परमार्थ सत् ।
भूषण मुनी का सत् रत्नत्रय, विज्ञ जानें परम हित ॥२०॥
अन्वयार्थ : निश्चय-रत्नत्रय की प्राप्ति में व्यवहार-रत्नत्रय, साधन है और निश्चय-रत्नत्रय, साध्य है । यह निश्चय रत्नत्रय, मुनियों का उत्तम भूषण है ॥२०॥