+ किस चिंतन का क्या फल -
वपुषां कर्मणां कर्महेतूनां चिंतनं यदा ।
तदा क्लेशो विशुद्धिः स्याच्छुद्धचिद्रूपचिंतनं ॥11॥
तन कर्म कारण कर्म की, चिन्ता स्वयं ही क्लेश है ।
निज शुद्ध चिद्रूप चिन्तनादि, विशुद्धि का हेतु है ॥१३.११॥
अन्वयार्थ : शरीर, कर्म और कर्म के कारणों का चिन्तन करना, क्लेश है अर्थात् उनके चिन्तन से आत्मा में क्लेश उत्पन्न होता है और शुद्ध-चिद्रूप के चिन्तन से विशुद्धि होती है ।