+ शुद्ध-चिद्रूप की असमर्थता पर अन्य कार्य -
गृही यतिर्न यो वेत्ति शुद्धचिद्रूप लक्षणं ।
तस्य पंचनमस्कारप्रमुखस्मरणं वरं ॥12॥
जो गृही या मुनिराज शुद्ध, चिद्रूप चिन्ह न जानते ।
तब उन्हें पंच णवकार आदि, स्मरण ही श्रेष्ठ है ॥१३.१२॥
अन्वयार्थ : जो गृहस्थ या मुनि शुद्ध-चिद्रूप का स्वरूप नहीं जानता, उसके लिए पञ्च परमेष्ठी के मन्त्रों का स्मरण करना ही कार्य-कारी है, उसी से उसका कल्याण हो सकता है ।