
विशुद्धेः शुद्धचिद्रूपसद्ध्यानं मुख्यकारणं ।
संक्लेशस्तद्विघाताय जिनेनेदं निरूपितं ॥15॥
सत् शुद्ध चिद्रूप ध्यान का, है मुख्य कारण विशुद्धि ।
संक्लेश है उसका विघातक, जिन निरूपित है यही ॥१३.१५॥
अन्वयार्थ : यह विशुद्धि, शुद्ध-चिद्रूप के ध्यान में मुख्य कारण है; इसी से शुद्ध-चिद्रूप के ध्यान की प्राप्ति होती है और संक्लेश, शुद्ध-चिद्रूप के ध्यान का विघातक है, जब तक आत्मा में किसी प्रकार का संक्लेश रहता है, तब तक शुद्ध-चिद्रूप का ध्यान कदापि नहीं हो सकता ।