+ विशुद्धि और चित्स्वरूप में स्थिति का संबंध -
विशुद्धेश्चित्स्वरूपे स्यात् स्थितिस्तस्या विशुद्धता ।
तयोरन्योन्यहेतुत्वमनुभूय प्रतीयतां ॥18॥
हो विशुद्धि से स्थिति चिद्रूप में उससे बड़े ।
नित विशुद्धि यों परस्पर, हेतुत्व जान उन्हें करें ॥१३.१८॥
अन्वयार्थ : विशुद्धि होने से शुद्ध-चिद्रूप में स्थिति होती है और विशुद्ध-चिद्रूप में निश्चलरूप से स्थिति करने से विशुद्धि होती है, इसलिए इन दोनों को आपस में एक-दूसरे का कारण जानकर इनका वास्तविक स्वरूप जान लेना चाहिए ।