+ सहेतुक शोक-त्याग की प्रेरणा -
अवश्यं च परद्रव्यं नश्यत्येव न संशयः ।
तद्विनाशे विधातव्यो न शोको धीमता क्वचित् ॥11॥
पर द्रव्य योग मिटे नियम से, यहाँ संशय है नहीं ।
उस नाश में नहिं शोक करते, साम्य रखते नित सुधी ॥१५.११॥
अन्वयार्थ : जो पर-द्रव्य हैं, उनका नाश अवश्य होता है । कोई भी उनके नाश को नहीं रोक सकता; इसलिए जो पुरुष बुद्धिमान हैं; स्व-द्रव्य और पर-द्रव्य के स्वरूप के भले प्रकार जानकार हैं; उन्हें चाहिए कि वे उनके नष्ट होने पर कभी किसी प्रकार का शोक न करें ।