
त्यक्त्वा मां चिदचित्संगा यास्यंत्येव न संशयः ।
तानहं वा च यास्मामि तत्प्रीतिरिति मे वृथा ॥12॥
चेतन अचेतन सब परिग्रह, मुझे छोड़ें नियम से ।
या मैं इन्हें तज चला जाऊँ, व्यर्थ इनसे प्रीति है ॥१५.१२॥
अन्वयार्थ : ये चेतन-अचेतन दोनों प्रकार के परिग्रह अवश्य मुझे छोड़ देंगे और मैं भी सदा काल इनका संग नहीं दे सकता; मुझे भी ये अवश्य छोड़ देने पड़ेंगे; इसलिए मेरा इनके साथ प्रेम करना व्यर्थ है ।