+ बंध और मोक्ष के कारण -
कारणं कर्मबन्धस्य परद्रव्यस्य चिंतनं ।
स्वद्रव्यस्य विशुद्धस्य तन्मोक्षस्यैव केवलं ॥16॥
पर द्रव्य चिन्तन से बँधें, नित कर्म निज चिद्रूप के ।
नित ध्यान से है मोक्ष, सब ही छूट जाते दु:ख से ॥१५.१६॥
अन्वयार्थ : स्त्री, पुत्र आदि पर-द्रव्यों के चिन्तन से केवल कर्म-बन्ध होता है और स्व-द्रव्य, विशुद्ध-चिद्रूप का चिन्तन करने से केवल मोक्ष-सुख ही प्राप्त होता है; संसार में भटकना नहीं पड़ता ।