
प्रादुर्भवंति निःशेषा गुणाः स्वाभाविकाश्चितः ।
दोषा नश्यंत्यहो सर्वे परद्रव्यवियोजनात् ॥17॥
प्रादुर्भवंति निःशेषा गुणाः स्वाभाविकाश्चितः ।
दोषा नश्यंत्यहो सर्वे परद्रव्यवियोजनात् ॥१७॥
अन्वयार्थ : समस्त पर-द्रव्यों के त्याग से, उन्हें न अपनाने से आत्मा के स्वाभाविक गुण-केवलज्ञान आदि प्रगट होते हैं और दोषों का नाश होता है ।