
समस्तकर्मदेहादिपरद्रव्यविमोचनात् ।
शुद्धस्वात्मोपलब्धिर्या सा मुक्तिरिति कथ्यते ॥18॥
तन कर्म सब पर-द्रव्य, तजने से निजातम प्राप्ति ।
परिपूर्ण शुद्ध दशामई, कहते उसे हैं मुक्ति ही ॥१५.१८॥
अन्वयार्थ : कर्म और शरीर आदि पर-द्रव्यों के सर्वथा त्याग से शुद्ध-चिद्रूप की प्राप्ति होती है और उसे ही यति-गण मोक्ष कहकर पुकारते हैं ।