+ एकान्त-वास का औचित्य -
विकल्पः स्याज्जीवे निगडनगजंबालजलधि –
प्रदावाग्न्यातापप्रगदहिमताजालसदृशः ।
वरं स्थानं छेत्रीपविरविकरागस्ति जलदा –
गदज्वालाशस्त्रीसममतिभिदे तस्य विजनं ॥5॥
विकल्प होते जीव में, बेड़ी गिरी कीचड़ उदधि ।
दावाग्नि आतप रोग हिम, बहु जाल सम अतएव ही ॥
छैनी पवी रवि अगस्त्य नक्षत्र मेघ सु औषधि ।
अग्नि छुरी सम नाश हेतु, विजन थल अति योग्य ही ॥१६.५॥
अन्वयार्थ : जीवों के विकल्प, बेड़ी, पर्वत, कीचड़, समुद्र, दावाग्नि का संताप, रोग, शीतलता और जाल के समान होते हैं; इसलिए उनके नाश के लिए छैनी, बज्र, सूर्य, अगस्त्य-नक्षत्र, मेघ, औषध, अग्नि और छुरी के समान निर्जन स्थान का ही आश्रय करना उचित है ।