+ एकान्त स्थान ही वास्तविक अमृत है; -
सुधाया लक्षणं लोका वदंति बहुधा मुधा ।
बाधाजंतुजनैर्मुक्तं स्थानमेव सतां सुधा ॥16॥
बहु अज्ञ कहते सुधा के, लक्षण अनेकों पर सदा ।
है जन्तु जन बाधा रहित, स्थान आतम को सुधा ॥१६.१६॥
अन्वयार्थ : लोक सुधा (अमृत) का लक्षण भिन्न ही प्रकार से बतलाते हैं; परन्तु वह ठीक नहीं, मिथ्या है; क्योंकि जहाँ पर किसी प्रकार की बाधा, डाँस, मच्छर आदि जीव और जन-समुदाय न हो ऐसे एकान्त-स्थान का नाम ही वास्तव में सुधा है ।