+ सिद्ध और संसारी के ज्ञान के अन्तर -
ज्ञेयावलोकनं ज्ञानं सिद्धानां भविनां भवेत् ।
आद्यानां निर्विकल्पं तु परेषां सविकल्पकं ॥8॥
नित सिद्ध संसारी सभी के, ज्ञेय दर्शन ज्ञान है ।
पर सिद्ध आकुलता रहित, संसारी साकुल दुखी हैं ॥१७.८॥
अन्वयार्थ : पदार्थों का देखना और जानना (दर्शन और ज्ञान), सिद्ध और संसारी दोनों के होता है; परन्तु सिद्धों के वह निर्विकल्प, आकुलता-रहित और संसारी जीवों के सविकल्प, आकुलता-सहित होता है ।