+ चिदात्मा की महिमा -
रवेः सुधायाः सुरपादपस्य चिंतामणेरुत्तमकामधेनोः ।
दिवो षिदग्धस्य हरेरखर्वं गर्वं हरन् भो विजयी चिदात्मा ॥12॥
हरि सूर्य अमृत सुरतरु, चिन्तामणि सुरधेनु दिव ।
विद्वान आदि का गर्व सब मिटा विजयी चिदातम ॥१७.१२॥
अन्वयार्थ : हे आत्मन्! यह चिदात्मा, सूर्य, अमृत, कल्पवृक्ष, चिन्तामणि, कामधेनु, स्वर्ग, विद्वान और विष्णु के अखण्ड गर्व को देखते-देखते चूर करनेवाला है और विजय-शील है ।