+ अन्य के त्याग में सुख की सतर्क सिद्धी -
मुक्ते बाह्ये परद्रव्ये स्यात्सुखं चेच्चितो महत् ।
सांप्रतं किं तदादोऽतः कर्मादौ न महत्तरं ॥15॥
हो रहित आतम बाह्य पर द्रव्यों से सुख होता अधिक ।
यदि कर्म आदि सभी से, हो पूर्ण विरहित सुख अतुल ॥१७.१५॥
अन्वयार्थ : जब बाह्य पर-द्रव्यों से रहित हो जाने पर भी आत्मा को महान सुख मिलता है; तब कर्म आदि का नाश हो जाने पर तो उससे भी अधिक महान सुख प्राप्त होगा ।