
संसारभीतितः पूर्वं रुचिर्मुक्तिसुखे दृढा ।
जायते यदि तत्प्राप्तेरुपायः सुगमोस्ति तत् ॥4॥
संसार भय से भीत शिव सुख में रुचि दृढ़ हो प्रथम ।
उत्पन्न यदि तो उसे पाने का उपाय सहज सुगम ॥१८.४॥
अन्वयार्थ : जिन मनुष्यों को संसार के भय से पूर्व ही मोक्ष-सुख की प्राप्ति में रुचि दृढ़ है, जल्दी संसार के दु:खों से मुक्त होना चाहते हैं । उन्हें समझ लेना चाहिए कि मुक्ति की प्राप्ति का सुगम उपाय मिल गया, वे बहुत शीघ्र मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं ।