
अष्टावंगानि योगस्य यमो नियम आसनं ।
प्राणायामस्तथा प्रत्याहारो मनसि धारणा ॥6॥
ध्यानश्चैव समाधिश्च विज्ञायैतानि शास्त्रतः ।
सदैवाभ्यसनीयानि भदंतेन शिवार्थिना ॥7॥
हैं योग के अष्टांग , यम व नियम आसन प्राणायाम ।
तथा प्रत्याहार मन में, धारणा अरु ध्यानमय ॥१८.६॥
अरु समाधि, शास्त्र से, नित समझ भवि मोक्षार्थि को ।
अभ्यास करना चाहिए, यदि चाहते चिद्रूप को ॥१८.७॥
अन्वयार्थ : यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि -ये आठ अंग, योग के हैं । इन्हीं के द्वारा योग की सिद्धि होती है; इसलिए जो मुनि मोक्षाभिलाषी हैं, समस्त कर्मों से अपने आत्मा को मुक्त करना चाहते हैं; उन्हें चाहिए कि शास्त्र से इनका यथार्थ स्वरूप जानकर सदा अभ्यास करते रहें ।