
सयोगक्षीणमिश्रेषु गुणस्थानेषु नो मृतिः ।
अन्यत्र मरणं प्रोक्तं शेषत्रिक्षपकैर्विना ॥10॥
केवलि सयोगी क्षीणमोही, मिश्र त्रय क्षय-श्रेणी के ।
गुणस्थान में मृत्यु नहीं, शेषान्य में वह हो सके ॥१८.१०॥
अन्वयार्थ : सयोग-केवली, क्षीण-मोह, मिश्र और क्षपक-गुणस्थान आठवें, नवमें और दशवें में मरण नहीं होता; परन्तु इनसे भिन्न गुणस्थानों में मरण होता है ।