+ किसमें मरण कर कहाँ जाते हैं? -
मिथ्यात्वेऽविरते मृत्या जीवा यांति चतुर्गतीः ।
सासादने विना श्वभ्रं तिर्यगादिगतित्रयं ॥11॥
मिथ्यात्व अविरति में मरण, तो चार गति में जा सके ।
सासन मरण में नरक विन, बस तीन गति में जा सके ॥१८.११॥
अन्वयार्थ : जो जीव मिथ्यात्व और अविरत-सम्यक्त्व (जिसने सम्यक्त्व होने से पहले आयु-बन्ध कर लिया हो) गुणस्थान में मरते हैं; वे मनुष्य, तिर्यञ्च, देव, नरक - चारों गतियों में और सासादन गुणस्थान में मरनेवाले नरक-गति में न जाकर शेष तिर्यञ्च आदि तीन गतियों में जाते हैं ।