
अभिमतफलसिद्धेरभ्युपाय सुबोध,
प्रभवति स च शास्त्रात्तस्य चोत्पत्तिराप्तात् ।
इति भवति स पूज्यस्तत्प्रसादात्प्रबुद्धे:,
न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति ॥59॥
अन्वयार्थ : अभीष्टफल की सिद्धि का श्रेष्ठ उपाय सम्यग्ज्ञान है और वह शास्त्र से उत्पन्न होता है; और उस की आप्त से उत्पत्ति । इसलिए उस के प्रसाद / अनुग्रह से प्रबोध पाने वालों के लिए वह पूज्य है क्योंकि किया गया उपकार सत्पुरुष नहीं भूलते ।