+ फल प्राप्ति में कृतज्ञता -
अभिमतफलसिद्धेरभ्युपाय सुबोध,
प्रभवति स च शास्त्रात्तस्य चोत्पत्तिराप्तात् ।
इति भवति स पूज्यस्तत्प्रसादात्प्रबुद्धे:,
न हि कृतमुपकारं साधवो विस्मरन्ति ॥59॥
अन्वयार्थ : अभीष्टफल की सिद्धि का श्रेष्ठ उपाय सम्यग्ज्ञान है और वह (सम्यग्ज्ञान) शास्त्र (के श्रवण) से उत्पन्न होता है; और उस (शास्त्र) की आप्त (तीर्थंकर / अर्हन्त आदि) से उत्पत्ति (होती है) । इसलिए उस (गुरु) के प्रसाद / अनुग्रह से प्रबोध पाने वालों के लिए वह (आप्त, आगम, गुरु) पूज्य है क्योंकि किया गया उपकार सत्पुरुष नहीं भूलते ।