+ सिद्ध-जीव का आकार -
असरीरा जीव घणा चरमसरीरा हवंति किंचूणा ।
जम्मण-मरण-विमुक्का णमामि सव्वे पुणो सिद्धा ॥72॥
रहित जन्म मृति एह, चरमदेहतैं कछु कमी ।
जीव अनंत विदेह, सिद्ध सकल वंदौं सदा ॥72॥
अन्वयार्थ : [पुणो] पुनः [सिद्धा जीवा] वे सिद्ध जीव [असरीरा] शरीर-रहित हैं, [घणा] अर्थात् बहुत घने हैं, [किंचणा] कुछ कम [चरम सरीरा] चरम शरीर प्रमाण हैं, [जन्म-मरण-विमुक्का] जन्म और मरण से रहित हैं। ऐसे [सव्वे सिद्धा] सर्व सिद्धों को [णमामि] मैं नमस्कार करता हूँ ।