
जचंदछाबडा :
भाव-मुनि सम्यग्दर्शन सहित हैं वे तो सोलहकारण भावना भाकर गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान, निर्वाण-पंचकल्याणक सहित तीर्थंकर पद पाकर मोक्ष पाते हैं और जो सम्यग्दर्शन रहित द्रव्य-मुनि हैं वे तिर्यंच, कुदेव योनि पाते हैं । यह भाव के विशेष से फल का विशेष है ॥१००॥ |