
चक्कहररामकेसवसुखरजिणगणहराइसोक्खाइं
चारणमुणिरिद्धीओ विसुद्धभावा णरा पत्ता ॥161॥
चक्रधररामकेशवसुरवरजिनगणधरादिसौख्यानि
चारणमुन्यर्द्धीः विशुद्धभावा नराः प्राप्ताः ॥१६१॥
चक्रधर बलराम केशव इन्द्र जिनवर गणपति ।
अर ऋद्धियों को पा चुके जिनके हैं भाव विशुद्धवर ॥१६१॥
अन्वयार्थ : विशुद्ध भाववाले ऐसे नर मुनि हैं वह चक्रधर राम केशव सुरवर जिन गणधर इनके सुखों को तथा चारणमुनि की ऋद्धियों को प्राप्त हुए ।
जचंदछाबडा
जचंदछाबडा :
पहिले इसप्रकार निर्मल भावों के धारक पुरुष हुए वे इस प्रकार के पदों के सुखों को प्राप्त हुए, अब जो ऐसे होंगे वे पावेंगे, ऐसा जानो ॥१६१॥
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