+ प्रतिकार रहित और कांक्षा रहित -
उवधिभरविप्पमुक्का वोसट्टंगा णिरंबरा धीरा ।
णिक्किंचण परिसुद्धा साधू सिद्धिं वि मग्गंति ॥798॥
अन्वयार्थ : वे साधु इहलोक की आकांक्षा, परलोक की आकांक्षा और परीषहों का प्रतिकार नहीं करते हैं ।