+ विहार करते हुए परिणाम -
उवसंतादीणमणा उवक्खसीला हवंति मज्झत्था ।
णिहुदा अलोलमसठा अबिह्यिया कामभोगेसु ॥806॥
जिणवयणमणुगणेंता संसारमहब्भयं हि चिंतंता ।
गब्भवसदीसु भीदा भीदा पुण जम्ममरणेसु ॥807॥
अन्वयार्थ : वे उपशान्त भावी, दीन मन से रहित, उपेक्षा स्वभाव वाले, जितेन्द्रिय, निर्लोभी, मूर्खता रहित और काम भोगों से विस्मय रहित होते हैं । वे जिन-वचनों का अनुचिंतन करते हुए तथा संसार के महान्, भय का विचार करते हुए गर्भवास से भयभीत रहते हैं तथा जन्म और मरणों से भी भयभीत रहते हैं ।