+ गर्भवास से भय का प्रतिकार -
दिट्ठ परमट्ठसारा विण्णाणवियक्खणाय बुद्धीए ।
णाणकयदीवियाए अगब्भवसदी विमग्गंति ॥809॥
अन्वयार्थ : वे मुनि संसार शरीर भोगों के स्वरूप को जान चुके हैं । अत: वे मतिज्ञान आदि रूप अतिशय कुशल बुद्धि से और श्रुतज्ञान रूप दीपक से गर्भवास-पुनर्जन्म रहित वसति की खोज करते हैं अर्थात् मोक्ष को चाहते हैं ।