+ संस्कार का स्वरूप -
मुहणयणदंतधोवणमुव्वट्टण पादधोयणं चेव ।
संवाहण परिमद्दण सरीरसंठावणं सव्वं ॥839॥
धूवण वमण विरेयण अंजण अब्भंग लेवणं चेव ।
णत्थुय वत्थियकम्मं सिरवेज्झं अप्पणो सव्वं ॥840॥
अन्वयार्थ : मुख, नेत्र और दांतों को धोना, उबटन लगाना, पैर धोना, अंग दबवाना, मालिस कराना ये सब शरीर संस्कार हैं । धूप देना, वमन करना, विरेचन करना, अंजन लगाना, तैल लगाना, लेप करना, नस्य लेना, वस्ति कर्म करना शिरावेध करना ये सब अपने शरीर के संस्कार हैं ।