
इत्थिकहा अत्थकहा भत्तकहा खेडकव्वडाणं च ।
रायकहा चोरकहा जणवदणयरायरकहाओ ॥857॥
णडभड मल्ल कहाओ मायाकरजल्लमुट्ठियाणं च ।
अज्जउललंघियाणं कहासु ण वि रज्जए धीरा ॥858॥
अन्वयार्थ : स्त्रीकथा, अर्थकथा, भोजनकथा, खेटकर्वटकथा, चोरकथा, जनपदकथा, नगरकथा, और आकार कथाये लौकिक कथाएँ हैं । नटों की कथा, भटों की कथा, मल्लों की कथा, मायाकरों की कथा, धीवरों की कथा, जुआरियों की कथा, दुर्गा आदि देवियों की कथा, बांस पर नाचने वालों की कथा इत्यादि कथाओ में धीर मुनि अनुरक्त नहीं होते हैं ।