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किस प्रकार की कथाएँ करें?
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जिणवयण भासिदत्थं पत्थं च हिदं च धम्मसंजुत्तं ।
समओवयारजुत्तं पारत्तहिदं कधं करेंति ॥862॥
अन्वयार्थ :
जो जिनागम में भाषित है, पथ्य है, हितकर है, धर्म से संयुक्त है, आगमकथित उपचार विनय से युक्त,परलोक क हितरूप, ऐसी कथाएँ वे मुनि करते हैं ।