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उपसंहार
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सत्ताधिय सप्पुरिसा मग्गं मण्णंति वीदरागाणं ।
अणयारभावणाए भावेंति य णिच्चमप्पाणं ॥863॥
अन्वयार्थ :
वे शक्तिशाली साधु वीतराग देवों के मार्ग को स्वीकार करते हैं और अनगार भावना के द्वारा नित्य ही आत्मा की भावना करते हैं ।