
छाबडा :
पहले मिथ्यात्व, अविरिति, प्रमाद, कषाय ओर योगरूप पाँच प्रकार का आस्रव कहा था, उनका अनुक्रम से रोकना ही संवर है । सो कैसे ? मिथ्यात्व का प्रभाव तो चतुर्थ-गुणस्थान में हुआ वहाँ अविरत का संवर हुआ । अविरत का अभाव एक-देश तो देशविरत में हुआ और सर्व-देश प्रमत्त-गुणस्थान में हुआ वहाँ अविरत का संवर हुआ । अप्रमत्त गुणस्थान में प्रमाद का अभाव हुआ वहाँ उसका संवर हुआ । अयोगिजिन में योगों का अभाव हुआ, वहाँ उनका संवर हुआ । इस तरह संवर का क्रम है । अब इसी को विशेषरूप से कहते हैं - |