
गुत्ती समिदी धम्मो अणुवेक्खा तह य परिसह -जओ वि
उक्कि ट्ठं चारित्तं संवर-हेदू विसेसेण ॥96॥
अन्वयार्थ : [गुत्ती] गुप्ति [समिदी] समिति [धम्मो] उत्तम क्षमादि दशलक्षण धर्म [अणुवेक्खा] अनित्य आदि बारह अनुप्रेक्षा [तह परीसहजओ वि] तथा क्षुधा आदि बाईस परीषह का जीतना [उक्किट्ठं चारित्तं] उत्कृष्ट चारित्र ये [विसेसेण] विशेषरूप से [संवेरहेदू] संवर के कारण हैं ।
छाबडा
छाबडा :
अब इनको स्पष्टरूप से कहते हैं -
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