+ इसी का विशेष कहते हैं -
गुत्ती समिदी धम्मो अणुवेक्खा तह य परिसह -जओ वि
उक्कि ट्ठं चारित्तं संवर-हेदू विसेसेण ॥96॥
अन्वयार्थ : [गुत्ती] (मन-वचन-काय की) गुप्ति [समिदी] (ईर्या, भाषा, एषणा, आदान-निक्षेपण और प्रतिष्‍ठापना) समिति [धम्‍मो] उत्तम क्षमादि दशलक्षण धर्म [अणुवेक्‍खा] अनित्‍य आदि बा‍रह अनुप्रेक्षा [तह परीसहजओ वि] तथा क्षुधा आदि बाईस परीषह का जीतना [उक्किट्ठं चारित्तं] उत्‍कृष्‍ट चारित्र (सामायिक आदि पाँच प्रकार) ये [विसेसेण] विशेषरूप से [संवेरहेदू] संवर के कारण हैं ।

  छाबडा 

छाबडा :

अब इनको स्‍पष्‍टरूप से कहते हैं -