
गुत्ती जोग-णिरोहो समिदी य पमाद वज्जणं चेव
धम्मो दया-पहाणो सुतत्त -चिंता अणुप्पेहा ॥97॥
अन्वयार्थ : [जोगणिरोहो] योगों का निरोध [गुत्ती] गुप्ति है [समिदि य पमादवज्जणं चेव] प्रमाद का वर्जन, यत्न-पूर्वक प्रवृत्ति समिति है [दयापहाणो] दयाप्रधान [धम्मो] धर्म है [सुतत्त-चिंता अणुप्पेहा] जीवादिक तत्व तथा निज-स्वरूप का चिंतवन अनुप्रेक्षा है ।
छाबडा