
सव्वेसिं क म्माणं सत्ति -विवाओ हवेइ अणुभाओ
तदणंतरं तु सडणं क म्माणं णिज्जरा जाण ॥103॥
अन्वयार्थ : [सव्वेसिं कम्माणं] समस्त ज्ञानावरणादिक अष्टकर्मों की [सत्तिविवाओ] शक्ति विपाक [अणुभाओ] अनुभाग [हवेइ] कहलाता है [तदणंतरं तु सडणं] उदय आने के अनन्तर ही झड़ जाने को [कम्माणं णिज्जरा जाण] कर्मों की निर्जरा जानना चाहिये ।
छाबडा
छाबडा :
कर्मों के उदय में आकर झड़ जाने को निर्जरा कहते हैं ।
अब कहते हैं कि यह निर्जरा दो प्रकार की है -
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