+ बादर और सूक्ष्म -
पुण्णा वि अपुण्णा वि य थूला जीवा हवंति साहारा ।
छविहा -सुहुमा जीवा लोयायासे वि सव्वत्थ ॥123॥
अन्वयार्थ : [साहारा] आधार-सहित [जीवा] जीव [थूला] स्थूल (बादर) [हवंति] होते हैं, [पुण्णा वि अपुण्णा वि य] वे पर्याप्त हैं और अपर्याप्त भी हैं; [लोयायासे वि सव्वत्थ सुहमा जीवा छविहा] लोकाकाश में सब जगह अन्य आधार-रहित हैं, वे सूक्ष्म जीव हैं और छह प्रकार के हैं ।

  छाबडा