+ बादर-सूक्ष्म का विस्तार -
पुढवी -जलग्गि-वाऊ चत्तारि वि होंति बायरा सुहुमा
साहारण-पत्तेया वणप्फ दी पंचमा दुविहा ॥124॥
अन्वयार्थ : [पुढवीजलग्गिवाऊ चत्तारि वि बायरा सुहमा होंति] पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु -- ये चार तो बादर भी होते हैं तथा सूक्ष्म भी होते हैं, [पंचमा वणप्फदी साहारणपत्तेया दुविहा] पाँचवीं वनस्पति साधारण और प्रत्येक के भेद से दो प्रकार की है ।

  छाबडा