
आहार-सरीरिंदिय -णिस्सासुस्सास-भास -मणसाणं
परिणइ वावारेसु य जाओ छ च्चेव सत्तीओ ॥134॥
अन्वयार्थ : [आहार-सरीरिंदिय -णिस्सासुस्सास-भास -मणसाणं] आहार, शरीर, इन्द्रिय, स्वासोच्छवास, भाषा और मन, [परिणइ वावारेसु य जाओ छच्चेव सत्तीओ]
इनकी परिणमन की प्रवृत्ति में सामर्थ्य, सो छह प्रकार की पर्याप्ति है ।
छाबडा