
माणुस-खित्तस्स बहि चरिम दीवस्स अद्धयं जाव
सव्वत्थे वि तिरिच्छा हिमवद -तिरिएहिं सारिच्छा ॥143॥
अन्वयार्थ : [माणुसखित्तस्स बहिं] मनुष्यक्षेत्र से बाहर मानुषोत्तर पर्वत से आगे [चरमे दीवस्स अद्धयं जाव] अन्त के स्वयंप्रभ द्वीप के आधे भाग तक [सव्वत्थे वि तिरिच्छा] बीच के सब द्वीप समुद्रों के तिर्यंच [हिमवदतिरिएहि सारिच्छा] हैमवत क्षेत्र के तिर्यंचों के समान हैं ।
छाबडा