खरभाय-पंकभाए भावण-देवाण होंति भवणाणि
विंतर -देवाण तहा दुण्हं पि य तिरिय-लोयम्मि ॥145॥
अन्वयार्थ : [खरभायपंकमाए] खरभाग पंकभाग में [भावणदेवाण] भवनवासियों के [भवणाणि] भवन [तहा] तथा [वितरदेवाण] व्यन्तर देवों के निवास [होंति] हैं [दुहपि य तिरियलोयम्मि] और इन दोनों के तिर्यग्लोक में भी निवास हैं ।

  छाबडा