जोइसियाण विमाणा रज्जू-मित्ते वि तिरिय-लोए वि
कप्प-सुरा उह्नम्मि य अह-लोए होंति णेरइया ॥146॥
अन्वयार्थ :  [जोइसियाण विमाणा] ज्योतिषो देवों के विमान [रज्जमित्ते वि तिरियलोए वि] एक राजू प्रमाण तिर्यग्लोक के असंख्यात द्वीप समुद्रों के ऊपर हैं [कप्पसुरा उड़ढमि य] कल्पवासी ऊर्ध्वलोक में है [णेरइया अहलोए होंति] नारकी अधोलोक में हैं ।

  छाबडा