बादर -पज्जत्ति-जुदा घण-आवलिया असंख-भागा दु
किंचूण -लोय-मित्ता तेऊ वाऊ जहा-कमसो ॥147॥
अन्वयार्थ : [तेऊ वाऊ] अग्निकाय, वातकाय के [बादरपजत्तिजुदा] बादर-पर्याप्त सहित जीव [घणआवलिया असंखभागा दु] धन आवली के असंख्यातवें भाग [किंचणलोयमिचा] तथा कुछ कम लोक के प्रदेशप्रमाण [जहाकमसो] यथा अनुक्रम जानना चाहिये ।

  छाबडा