
पुढवी-तोय -सरीरा पत्तेया वि य पइट्ठिया इयरा
होंति असंखा सेढी पुण्णापुण्णा य तह य तसा ॥148॥
अन्वयार्थ : [पुढवीतोयसरीरा] पृथ्वीकायिक, अप्कायिक [पत्तेया वि य पइट्ठिया इयरा] प्रत्येक वनस्पतिकायिक सप्रतिष्ठित वा अप्रतिष्ठित [तह य तसा] तथा त्रस -- ये सब [पुण्णापुण्णा] पर्याप्त अपर्याप्त जीव हैं [असंखा सेढी होंति] वे जुदे-जुदे असंख्यात जगतश्रेणीप्रमाण हैं ।
छाबडा